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डॉ. अंबेडकर ने महिलाओं और वंचित वर्गों को समान अधिकार दिलाने के लिए आजीवन किया संघर्ष

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एडवोकेट सुशील गुप्ता 
भारत रत्न, संविधान निर्माता और महान समाज सुधारक डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का जीवन समानता, न्याय और मानव अधिकारों की मिसाल है। उन्होंने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त कर विश्व स्तर पर सम्मान अर्जित किया और समाज के दबे-कुचले वर्गों के लिए नई राह दिखाई। डॉ. अंबेडकर केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि अर्थशास्त्री, शिक्षाविद, न्यायविद और दूरदर्शी चिंतक भी थे।
डॉ. अंबेडकर ने महिलाओं, दलितों, पिछड़े और वंचित वर्गों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकार दिलाने के लिए आजीवन संघर्ष किया। उनका मानना था कि किसी भी समाज की प्रगति महिलाओं की स्थिति से मापी जाती है। इसी सोच के साथ उन्होंने महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए।
महिलाओं के अधिकारों के लिए ऐतिहासिक योगदान
डॉ. अंबेडकर ने देश के पहले कानून मंत्री रहते हुए हिंदू कोड बिल का मसौदा तैयार किया। इसके माध्यम से महिलाओं को संपत्ति में अधिकार, तलाक का अधिकार, विधवा पुनर्विवाह, गोद लेने का अधिकार और पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी जैसे महत्वपूर्ण अधिकार देने का प्रयास किया। यद्यपि उस समय यह बिल पूरी तरह पारित नहीं हो सका, लेकिन उन्होंने सिद्धांतों से समझौता न करते हुए मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने महिलाओं के लिए प्रसूति अवकाश, समान वेतन और रोजगार में अवसरों की वकालत की। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के माध्यम से महिलाओं को समानता, भेदभाव से मुक्ति और समान अवसर का अधिकार मिला।
शिक्षा को बनाया सशक्तिकरण का माध्यम
डॉ. अंबेडकर का विश्वास था कि शिक्षा ही महिलाओं और वंचित वर्गों की मुक्ति का सबसे बड़ा साधन है। उन्होंने कहा था कि शिक्षा से ही समाज में बदलाव संभव है। उन्होंने लड़कियों की शिक्षा, छात्रावास, छात्रवृत्ति और आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर दिया।
सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज
बाबासाहेब ने बाल विवाह, पर्दा प्रथा, सती प्रथा और बहुपत्नी प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों का खुलकर विरोध किया। उनका मानना था कि जब तक महिलाएं इन बंधनों से मुक्त नहीं होंगी, तब तक समाज का वास्तविक विकास संभव नहीं है।
आज भी प्रेरणा स्रोत
आज देश की महिलाएं शिक्षा, रोजगार, राजनीति और संपत्ति के अधिकारों में जो भागीदारी निभा रही हैं, उसकी मजबूत नींव डॉ. अंबेडकर ने रखी थी। उनका जीवन संदेश देता है कि समानता, शिक्षा और न्याय से ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण होता है।
डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का महिलाओं और समाज के उत्थान में योगदान सदैव याद किया जाएगा।
एडवोकेट सुशील गुप्ता 

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