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कठुआ, स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान दिवस की स्मृति में आर्य समाज कठुआ द्वारा आयोजित गीता ज्ञान सप्ताह के तृतीय दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। कार्यक्रम में गीता के तृतीय अध्याय कर्म योग पर विस्तृत और प्रेरणादायी प्रवचन प्रस्तुत किए गए।

कार्यक्रम की शुरुआत गीता के द्वितीय अध्याय के संक्षिप्त सार से हुई, जिसके पश्चात कर्म योग अध्याय पर मुख्य वक्ता पूजनीय सुश्री गायत्री देवी जी ने विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कर्म योग ही जीवन का मूल आधार है और बिना फल की आसक्ति के किया गया कर्म ही सच्चा धर्म है।

उन्होंने बताया कि समाज का संचालन कर्म से ही संभव है और निस्वार्थ भाव से किए गए कार्य आत्मा को शुद्ध करते हैं। उनके विचारों ने उपस्थित श्रोताओं को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया तथा जीवन में सकारात्मक दिशा प्रदान की।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि सरदार रणजीत सिंह एवं दलीप मेहता ने कहा कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और राष्ट्रीय सशक्तिकरण का मार्गदर्शक है। उन्होंने युवाओं से कर्म योग को अपनाकर समाज सेवा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
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संरक्षक भारत भूषण ने कहा कि गीता का प्रत्येक अध्याय जीवन की कठिन परिस्थितियों में मार्गदर्शन करता है और समाज को एक सूत्र में बांधता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आर्य समाज कठुआ के अध्यक्ष बिशन भारती ने मुख्य वक्ता, अतिथियों और उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि गीता ज्ञान सप्ताह अब एक प्रेरणादायी सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, समाजसेवी और युवा उपस्थित रहे। गीता ज्ञान सप्ताह प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक जारी रहेगा, जिसमें विद्वानों द्वारा गीता के विभिन्न अध्यायों पर प्रवचन दिए जाएंगे।









