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पूर्णिमा पर साहिब बंदगी सद्गुरु श्री मधुपरमहंस जी महाराज का संदेश: “नाम ही जीव की सबसे बड़ी सुरक्षा है”

सबका जम्मू कश्मीर।
राँजड़ी (जम्मू):पूर्णिमा के पावन अवसर पर साहिब बंदगी के सद्गुरु श्री मधुपरमहंस जी महाराज ने राँजड़ी, जम्मू में अपने प्रवचनों से संगत को निहाल किया। उन्होंने सरल उदाहरणों के माध्यम से आत्मिक जीवन के गहरे सत्य समझाए।

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सद्गुरु जी ने कहा कि जैसे रस्सी से बंधी गेंद जितनी ही दूर जा सकती है, जितनी रस्सी की लंबाई होती है, उसी तरह मन चाहे कितना भी विरोध करे, लेकिन अंतःकरण गुरु से जुड़ा रहता है। उन्होंने संगत को सावधान करते हुए कहा कि भूलकर भी गुरुजनों से प्रशंसा नहीं चाहनी चाहिए, क्योंकि यह सबसे घाटे का सौदा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जीव कुछ नहीं करता, सब कुछ साहिब ही करता है।

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उन्होंने संत वाणी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सभी संतों की वाणी में कबीर साहिब की छाप मिलती है। यदि किसी ने कबीर साहिब को समझ लिया, तो हर संत की वाणी में उसे कबीर दिखाई देंगे, क्योंकि साहिब असीम सागर हैं।

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सद्गुरु जी ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध विद्वान हजारी प्रसाद द्विवेदी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने माना था कि अध्यात्म पर जो कुछ कहना था, वह कबीर साहिब कह चुके हैं। वहीं कबीर साहिब स्वयं कहते हैं कि उन्होंने असंख्य वाणियाँ कही हैं, फिर भी सार शब्द का पूरा वर्णन संभव नहीं हो पाया।

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अंत में सद्गुरु श्री मधुपरमहंस जी महाराज ने कहा कि “नाम” अद्भुत शक्ति है, जो पूर्ण गुरु से प्राप्त होता है और वही नाम हमेशा जीव की रक्षा करता है।

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