सद्गुरु श्री मधुपरमहंस जी महाराज ने राँजड़ी में प्रवचनों से मन और आत्मा का भेद समझाया
सबका जम्मू कश्मीर
राँजड़ी (जम्मू): साहिब बंदगी के सद्गुरु श्री मधुपरमहंस जी महाराज ने आज राँजड़ी, जम्मू में आयोजित सत्संग के दौरान अपने प्रवचनों की अमृत वर्षा से संगत को निहाल किया।

उन्होंने कहा कि मन पूरे संसार को अपने इशारों पर नचा रहा है और इंसान अपने वास्तविक स्वरूप यानी आत्मा को भूल चुका है।
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सद्गुरु जी ने बताया कि जो कुछ भी संसार में दिखाई देता है, वह सब मन का ही विस्तार है। जैसा मन का संकल्प होता है, वैसा ही इंसान कर्म करता है। हर क्रिया का मूल कारण मन ही है, लेकिन मन को कोई ठीक से समझ नहीं पा रहा है। इंसान कहता है कि यह मेरी इच्छा है, जबकि वास्तव में इंसान आत्मा है और इच्छाएँ मन की होती हैं।

उन्होंने कहा कि आज के समय में सोशल मीडिया पर फैल रहा झूठ, छल, कपट और पाप आत्मा से नहीं, बल्कि मन से उत्पन्न हो रहा है। पूरे ब्रह्मांड पर मन का ही प्रभाव है और सारा संसार मन के नियंत्रण में चल रहा है।

सद्गुरु श्री मधुपरमहंस जी ने समझाया कि काम, क्रोध जैसे विकार मन से पैदा होते हैं। मन ही पुत्र है, मन ही पिता है, मन ही राजा है और मन ही प्रजा है। पूरी दुनिया मनमय हो चुकी है। सर्दी-गर्मी का अनुभव त्वचा करती है, खुशबू नाक से महसूस होती है, शब्द कानों से और दृश्य आँखों से दिखाई देते हैं। इसी तरह मन का अनुभव केवल ध्यान के माध्यम से ही जाना जा सकता है। ध्यान ही आत्मा है, लेकिन मन हर समय ध्यान को भटकाता रहता है।

प्रवचन के दौरान उन्होंने एक शराबी का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे नशे में व्यक्ति को झूठ भी सच लगता है, वैसे ही मन के नशे में यह संसार लोगों को सत्य जैसा प्रतीत हो रहा है। जैसे नींद में देखा गया सपना उस समय सच लगता है, उसी तरह यह संसार भी एक भ्रम की तरह प्रतीत हो रहा है।
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अंत में सद्गुरु जी ने कहा कि मन शरीर के हर रोम-रोम को अपने अनुसार चला रहा है और आत्मा के साथ बड़ा धोखा हो रहा है। सत्य को जानने के लिए मन से ऊपर उठकर ध्यान और आत्मबोध की आवश्यकता है।









