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नए साल की शुरुआत के साथ ही मां वैष्णो देवी के दरबार में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम

सबका जम्मू कश्मीर

कटरा रोहित शर्मा, नए साल की शुरुआत के साथ ही मां वैष्णो देवी के दरबार में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। दूर-दराज़ से आए श्रद्धालु नए वर्ष की खुशियां और सुख-समृद्धि की कामना लेकर माता रानी के चरणों में शीश नवाने पहुंच रहे हैं।

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पल भर में संकट हरने वाली मां वैष्णो देवी अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती हैं। पिंडी रूप में माता के दर्शन से व्यक्ति पाप मुक्त होकर आध्यात्मिक शांति प्राप्त करता है। उपरोक्त विचार प्रसिद्ध इंटरनेशनल भजन व भेंट लेखक अनिल कत्याल (नीले) ने विशेष वार्ता में व्यक्त किए।

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उन्होंने बताया कि वे पिछले नौ वर्षों से निरंतर मां वैष्णो देवी की भेंटें लिख रहे हैं। अब तक वे लगभग 12,500 से अधिक भेंटों की रचना कर चुके हैं, जबकि उनका लक्ष्य एक लाख भेंटें लिखने का है, जो केवल माता भगवती की कृपा से ही संभव होगा।

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अनिल कत्याल ने कहा कि जो कुछ भी वे लिखते हैं, वह माता रानी की प्रेरणा और कृपा से ही लिखते हैं। उनकी लिखी भेंटें मां वैष्णो देवी भवन और अर्धकुंवारी मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम होने वाली दिव्य आरती में नियमित रूप से गाई जाती हैं। इसके अतिरिक्त, देशभर में आयोजित माता के जागरणों और चौकियों में भी उनके लिखे भजन व भेंटें श्रद्धालुओं के बीच विशेष लोकप्रियता हासिल कर रही हैं। उन्होंने बताया कि मां सरस्वती ज्ञान और सुख प्रदान करती हैं, मां लक्ष्मी भक्तों के भंडार भरती हैं और मां काली कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती हैं। मां का प्रेम ही सच्चा प्रेम है, जिसे पाने से मन और आत्मा शीतल हो जाते हैं। श्रद्धा भाव से माता के दरबार में आने वाला कोई भी भक्त कभी खाली हाथ नहीं लौटता।

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दिल्ली के पहाड़गंज, डोर वाली गली के निवासी अनिल कत्याल बचपन से ही मां वैष्णो देवी के दरबार में आते रहे हैं। वर्ष 2016 से उन्होंने भजन व भेंट लेखन की यात्रा शुरू की, जो आज भी निरंतर जारी है। उनकी लिखी भेंटें धार्मिक स्थलों के साथ-साथ श्रद्धालुओं के हृदय में विशेष स्थान बना चुकी हैं। अनिल कत्याल द्वारा लिखित “वैष्णो आराधना” नामक आठ पुस्तकें अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं, जिन्हें वे मां के भक्तों को निशुल्क भेंट स्वरूप प्रदान करते हैं। नए वर्ष के अवसर पर उनके द्वारा लिखी गई विशेष भेंटें —
“सैनु मईआ जी ने पाईआ चिठ्ठीयां…
असां दरबार जा रेयां…
लैन नवें साल दी खुशियां…”
इन दिनों कटड़ा में आयोजित जागरणों में गायकों द्वारा श्रद्धा भाव से गाई जा रही हैं।
अनिल कत्याल ने भावुक होते हुए कहा कि वे स्वयं को अत्यंत भाग्यशाली मानते हैं कि मां वैष्णो देवी ने उन्हें इस पावन सेवा के लिए चुना है। उन्होंने कहा कि जब तक माता रानी की कृपा बनी रहेगी, वे भजन और भेंट लेखन का यह सेवा कार्य निरंतर जारी रखते हुए माता के चरणों में समर्पित रहेंगे।

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