उ.प्रगाजीपुर

अधिकारी नहीं मानते सरकार का फरमान,सरकारी नंबर उठाने में होती है जिले के अधिकारियों को परेशानी

अवनीश सिंह
गाज़ीपुर/उत्तर प्रदेश

जी हां यह गाजीपुर जिला है यहां के अधिकारियों को सरकारी नंबर उठाने में परेशानी महसूस होती है,जबकि योगी सरकार का सख्त आदेश है कि कि प्रत्येक जिम्मेदार अधिकारी अपने सरकारी नंबर को हमेशा आन रखें एवं तुरंत कॉल उठाये। लेकिन यहां के अधिकारी हैं कि सरकार की आदेशों का खुला उल्लंघन करते हैं।

सबसे पहले गाजीपुर जिले के विद्युत विभाग खंड तृतीय के अधिशासी अभियंता बृजेश कुमार का नाम इनमें सबसे आगे है।यह महोदय अपने सीयूजी नंबर को उठाते ही नहीं आप इनको कितना भी फोन करें,इन्हें फोन उठाने में परेशानी महसूस होती है। इनका फोन उठता ही नहीं है।दूसरा नंबर जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमंत कुमार का आता है।जो कि कभी कभार ही फोन उठाते वरना यह भी फोन उठाना नहीं चाहते।इनका तो आलम यह है कि यह अपने कर्मचारियों पर कार्रवाई करने में भी कतराते हैं।जिले के प्राथमिक विद्यालयों में कहीं मिड डे मील ना तो समय से बनता है ना ही मेनू के अनुसार भोजन दिया जाता है। इतना ही नहीं जिले के विद्यालयों में उपस्थिति रजिस्टर में बच्चों की उपस्थिति, भौतिक उपस्थिति से ज्यादा दिखाकर मानक को पूरा किया जाता है।जब इन महाशय से कहा जाए तो इनका एक रटा रटाया जवाब आता है कि आप शिकायत लिख कर दीजिए मैं कार्रवाई करूंगा। लेकिन फिर भी यह कुछ भी कार्रवाई नहीं करते और मामले को ठंडा बस्ते में डाल देते हैं।तीसरा नंबर जिले के जिला पंचायत राज अधिकारी अंशुल मौर्य का है।यह महाशय भी कभी फोन नहीं उठाते।कभी ऑफिस में कोई चला गया पहले तो यह मिलना ही नहीं चाहते और अगर खुदानखास्ते मिल भी गए यह उलूल जुलूल बात ही किया करते।हालांकि अंशुल मौर्य अपनी हरकतों से हमेशा चर्चा में रहे हैं।अभी कुछ दिन पहले जिला पंचायत राज अधिकारी अंशुल मौर्य की आवास पर सफाई कर्मियों द्वारा खाना बनाने तथा बूट पॉलिश करने का वीडियो वायरल हुआ था।इतना ही नहीं एक महिला सफाई कर्मी जो कि उनके घर पर रहकर उनके बच्चों का देखभाल करती थी।उसने भी इन महाशय पर कुछ गंभीर आरोप लगाया था और उसका भी कुछ वीडियो वायरल हुआ था। हालांकि सूत्रों के मुताबिक उस महिला को अपनी नौकरी गंवाकर इसका परिणाम भुगतना पड़ा। यह महाशय अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर इन सब मामलों को दबा दिए।

इस तरीके से जिले की कई ऐसे अधिकारी हैं जो कि अपने सरकारी नंबर को नहीं उठाते और मुलाकात करने पर अधिकारियों वाली रौब झाड़ते जिससे आम आदमी परेशान एवं डर जाता है और इन अधिकारियों के पास जाने से कतराता है।

आखिर यह अधिकारी चाहते क्या हैं,यह तो समझ से परे है लेकिन इतना तो जरूर है यह जिम्मेदार अफसर अपनी जिम्मेदारियां को बखूबी नहीं निभाना चाहते।ना इन्हें सरकार की कार्रवाई का डर और ना इन्हें जिलाधिकारी का डर।यह अपने लालफीताशाही में मस्त हैं और मस्त ही रहना चाहते। ऐसे अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई की जरूरत है ताकि अपनी जिम्मेदारियों को महसूस कर सके और जिम्मेदारी पूर्ण व्यवहार करें।

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