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गीता ज्ञान सप्ताह के द्वितीय दिवस पर सांख्य योग का संदेश, स्वामी श्रद्धानंद जी को भावपूर्ण स्मरण

आर्य समाज कठुआ में पुजनीय गायत्री देवी जी का प्रेरक प्रवचन, आत्मा की अमरता और कर्मयोग पर दिया सरल संदेश

कठुआ,: स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान दिवस की स्मृति में आर्य समाज कठुआ में आयोजित गीता ज्ञान सप्ताह के द्वितीय दिवस पर आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, युवा और समाजसेवी उपस्थित रहे।

आर्य समाज मंदिर में चल रही कथा को सुनते स्थानीय लोग
आर्य समाज मंदिर में चल रही कथा को सुनते स्थानीय लोग

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता पुजनीय सुश्री गायत्री देवी जी ने गीता के द्वितीय अध्याय पर प्रवचन देते हुए सांख्य योग की सरल और प्रभावशाली व्याख्या की। उन्होंने कहा कि आत्मा न जन्म लेती है और न ही मरती है। यह सत्य मनुष्य को भय, शोक और मोह से मुक्त कर कर्मयोग के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। अर्जुन संवाद के माध्यम से उन्होंने समझाया कि जब जीवन में भ्रम और निराशा आती है, तब गीता कर्तव्य और धर्म का सही मार्ग दिखाती है।

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गायत्री देवी जी ने सरल भाषा में गूढ़ विचार प्रस्तुत करते हुए गीता के संदेश को आज के जीवन से जोड़ा। उनके प्रवचन ने युवाओं में आत्मविश्वास जगाया और समाजसेवियों को निस्वार्थ कर्म करने की प्रेरणा दी।

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इस अवसर पर मुख्य अतिथि कैप्टन जियान सिंह पठानिया (समाजसेवी), प्रोफेसर राम मूर्ति  और प्रधानाचार्य द्वारका नाथ  ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला और समाज को जोड़ने का माध्यम है।

कार्यक्रम के संरक्षक  भारत भूषण  और अध्यक्ष  विशन भारती  ने कहा कि गीता का प्रत्येक अध्याय जीवन के संघर्षों में मार्गदर्शन देता है और समाज को एकजुट करने की शक्ति रखता है। गीता ज्ञान सप्ताह प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक आयोजित किया जा रहा है।

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