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विश्व मधुमेह दिवस पर घाव देखभाल के महत्व पर डॉ. सामिया मोहन ने डाला प्रकाश

सबका जम्मू कश्मीर।

जम्मू, 14 नवंबर: विश्व मधुमेह दिवस के अवसर पर एएससीओएमएस की सहायक प्रोफेसर डॉ. सामिया मोहन ने मधुमेह रोगियों में घाव भरने और देखभाल के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि अनियंत्रित मधुमेह शरीर की घाव भरने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है, जिससे संक्रमण, अल्सर, गैंग्रीन और अंग-विच्छेदन जैसी जटिलताएँ हो सकती हैं।

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उन्होंने बताया कि भारत में 2019 में 77 मिलियन से अधिक लोग मधुमेह से प्रभावित थे, और 2045 तक यह संख्या 134 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो जागरूकता और निवारक उपायों की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है।

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डॉ. मोहन ने कहा कि उचित ग्लाइसेमिक नियंत्रण (HbA1c 7% से कम), मामूली घावों की सतर्क देखभाल, तंग जूतों से परहेज, और समय पर चिकित्सा सलाह अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि डीब्राइडमेंट, एंटीबायोटिक्स, नेगेटिव प्रेशर वाउंड थेरेपी (NPWT), हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी और स्टेम सेल थेरेपी जैसे आधुनिक उपचार विकल्प घावों के उपचार में प्रभावी सिद्ध हो रहे हैं।

 

उन्होंने कहा कि शिक्षा, शीघ्र पहचान, उचित पैर और घाव की देखभाल तथा मानसिक स्वास्थ्य प्रबंधन के माध्यम से मधुमेह और उसकी जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
डॉ. मोहन ने निष्कर्ष में कहा, “शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य मिलकर मधुमेह रोगियों के ग्लाइसेमिक नियंत्रण और जीवन की गुणवत्ता सुधारने में सहायक होते हैं।”

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