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“डोगरी संगीत संध्या” ने बुज़ुर्गों के दिलों में भरा दीपावली का उजास — अंबफल्ला वृद्धाश्रम में संस्कृति और संवेदना का संगम

जम्मू, 20 अक्तूबर 2025:
दीपावली की पूर्व संध्या पर जम्मू के अंबफल्ला स्थित “द होम फॉर द एज्ड एंड इन्फर्म” वृद्धाश्रम एक भावनात्मक और सुरमयी आयोजन का साक्षी बना, जब “डोगरी संगीत संध्या – एक शाम बुज़ुर्गों के नाम” कार्यक्रम ने वहां सांस्कृतिक सौहार्द और मानवीय करुणा का माहौल रच दिया।

इस विशेष आयोजन का संयुक्त रूप से आयोजन जम्मू एवं कश्मीर कला, संस्कृति और भाषाएं अकादमी (JKAACL) तथा नामी डोगरी संस्था (NDS), जम्मू द्वारा किया गया, जिसका उद्देश्य था — बुज़ुर्ग निवासियों के साथ दीपावली की खुशियाँ बाँटना और उन्हें सम्मानित करना।

मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री बृज मोहन शर्मा, IFS, प्रिंसिपल सेक्रेटरी, संस्कृति विभाग, जम्मू-कश्मीर सरकार ने की। उनके साथ विशिष्ट अतिथियों में सचिव श्रीमती हरविंदर कौर, अतिरिक्त सचिव सुश्री सोनाली अरुण गुप्ता, मिशन शक्ति इंचार्ज सुश्री शगुन, यति सत्य प्रिया जी (पूर्व मेयर, सुंदर नगर), वरिष्ठ साहित्यकार श्री ओ.पी. शर्मा ‘विद्यार्थी’, कैप्टन एल.के. शर्मा, संरक्षक सुश्री अनुपमा शर्मा, तथा नामी डोगरी संस्था के अध्यक्ष एडवोकेट डोगरा हरीश कैला सहित अनेक गणमान्य व्यक्तित्व उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ वृद्धाश्रम के एम.सी.एम. सदस्य इंजीनियर श्री पंकज गुप्ता के स्वागत भाषण से हुआ, जिसमें उन्होंने आयोजकों का आभार जताते हुए इस सांस्कृतिक पहल को दीपावली के सच्चे संदेश — “प्रकाश, आनंद और अपनापन” — का प्रतीक बताया।

कार्यक्रम में प्रस्तुत डोगरी संगीत और गीतों ने वातावरण को पूरी तरह भाव-विभोर कर दिया। पारंपरिक सुरों और भावपूर्ण गायन ने बुज़ुर्ग निवासियों को डुग्गर संस्कृति की जड़ों से जोड़ा और उनमें स्मृतियों व भावनाओं की गहराई को जगाया।

श्री बृज मोहन शर्मा ने अपने संबोधन में इस आयोजन की सराहना करते हुए इसे “पीढ़ियों के बीच संबंधों को प्रगाढ़ करने वाला” बताया। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम अन्य सामाजिक संस्थानों में भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे।

समापन अवसर पर वृद्धाश्रम के सचिव डॉ. दिनेश गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया, जिसके पश्चात सभी अतिथियों ने बुज़ुर्ग निवासियों से संवाद कर दीपावली की शुभकामनाएं साझा कीं।

पूरा कार्यक्रम प्रेम, संगीत और सामाजिक अपनत्व से ओत-प्रोत रहा — दीपावली के मूल भाव “प्रकाश, प्रेम और खुशियाँ बाँटना” को सार्थक करता हुआ।

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