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“गुजरात नेतृत्व को लेकर अखिल भारतीय सनातन धर्म जागरण मंच का आवाहन — जैन मुनि सूर्यसागर महाराज के नाम पर समर्थन जुटा”

“योगी मॉडल जैसे प्रशासनिक नेतृत्व की माँग — मंच ने गुजरात के लिए जैन मुनि सूर्यसागर महाराज के नेतृत्व का प्रस्ताव रखा”

नई दिल्ली/अहमदाबाद।
अखिल भारतीय सनातन धर्म जागरण मंच ने गुजरात राज्य के भावी नेतृत्व को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखते हुए जैन मुनि सूर्यसागर महाराज को “योगी मॉडल” जैसा सशक्त, कठोर और राष्ट्रवादी नेतृत्व प्रदान करने की क्षमता वाला व्यक्तित्व बताया है। मंच के अंतरराष्ट्रीय संयोजक शिवकुमार सिंह ने देश और विदेश में बसे सनातनी समाज से व्यापक सहभागिता की अपील की है।

मंच की ओर से जारी अपील में कहा गया है कि यदि गुजरात में सनातन मूल्यों, धार्मिक सद्भाव और समाज-आधारित राष्ट्रनिर्माण की प्रक्रिया को मजबूती देनी है, तो जैन मुनि सूर्यसागर महाराज जैसे तेजस्वी, अनुशासित और आध्यात्मिक नेतृत्व के विकल्प पर गंभीर विचार होना चाहिए। मंच का दावा है कि गुजरात में “योगी मॉडल” जैसे साफ-सुथरे, नियम-आधारित और कड़े शासन की आवश्यकता है, ताकि सामाजिक विघटन, कट्टर विचारधाराओं और राजनीतिक ध्रुवीकरण से राज्य को सुरक्षित रखा जा सके।

30 प्रदेशों और 26 देशों में बसे प्रवासी सनातनी समाज से समर्थन की अपील

मंच ने बताया कि अभियान को देश के 30 राज्यों, उत्तर प्रदेश के 75 जिलों और विश्वभर के 26 देशों में बसे प्रवासी सनातनी समाज तक पहुँचाया जा रहा है। मंच का मानना है कि वैश्विक स्तर पर जुड़े भारतीय सनातनियों की सामूहिक आवाज़ भारत के किसी भी राज्य में सामाजिक-सांस्कृतिक मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण धुरी बन सकती है।

अंतरराष्ट्रीय संयोजक शिवकुमार सिंह ने संदेश में कहा—
“यदि सनातन विरोधी ताकतों की जड़ें समाप्त नहीं की गईं, और समाज जागरूक नहीं हुआ, तो वामपंथी एवं छद्म-धर्मनिरपेक्ष तत्वों को और बल मिलेगा।”
उन्होंने सभी सनातनी—हिन्दू, जैन, सिख और बौद्ध समुदायों से आग्रह किया कि जैन मुनि सूर्यसागर महाराज जी के नेतृत्व के प्रस्ताव पर सकारात्मक सहभागिता दर्ज करें।

गुजरात में सामाजिक-धार्मिक नेतृत्व पर नई बहस

मंच के इस प्रस्ताव ने गुजरात के राजनीतिक-सामाजिक परिदृश्य में एक नई चर्चा को जन्म दिया है। राज्य में आध्यात्मिक नेतृत्व की भूमिका को लेकर लंबे समय से विचार-विमर्श होता रहा है। कई संगठन यह मानते हैं कि आधुनिक शासन व्यवस्था में धर्माचार्यों की भूमिका “नैतिक मार्गदर्शक” की होनी चाहिए, लेकिन मंच ने इससे आगे बढ़कर उन्हें प्रत्यक्ष नेतृत्व के विकल्प के रूप में सामने रखा है।

गुजरात, जहाँ राष्ट्रवादी, सांस्कृतिक और विकासवादी मॉडल पहले से ही सक्रिय रूप से स्थापित है, वहां यह प्रस्ताव राजनीतिक दलों, समाज और आम जनमानस के बीच एक व्यापक बहस का कारण बन सकता है।

अखिल भारतीय सनातन धर्म जागरण मंच का यह अभियान, जहाँ एक ओर आध्यात्मिक-आधारित शासन की धारणा को आगे बढ़ाता है, वहीं दूसरी ओर यह भी दर्शाता है कि भारतीय समाज में नेतृत्व को लेकर नए विमर्श लगातार उभर रहे हैं। मंच ने देशभर के सनातनी समाज से अपील करते हुए कहा—

शिवकुमार सिंह ने –
“धन्यवाद, करते हुऐ वन्दे मातरम्, भारत माता की जय, सत्य सनातन धर्म की जय का घोष से समापन किया।”

रविंद्र आर्य
(विश्लेषणात्मक पत्रकार, लेखक और भारतीय लोकसंस्कृति के संवाहक हैं।)

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