
संपादक की कलम से
भारत का संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि हर नागरिक के अधिकारों और कर्तव्यों का मार्गदर्शक है। यह आम नागरिक को उसके मूल अधिकारों और लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करता है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर स्कूलों में संविधान को कब व्यवस्थित रूप से पढ़ाया जाएगा।
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आज जब समाज में राजनीतिक और सामाजिक बहसें लगातार तेज हो रही हैं, तब बच्चों को संविधान की जानकारी देना और भी जरूरी हो जाता है। यदि बचपन से ही विद्यार्थियों को संविधान के मूल अधिकार, कर्तव्य और उसकी महत्ता बताई जाए तो वे बड़े होकर न केवल अपने अधिकारों के प्रति सजग होंगे, बल्कि दूसरों के अधिकारों का भी सम्मान करेंगे।

संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने जिस सोच और दृष्टिकोण से इस संविधान की रचना की, उसका उद्देश्य यही था कि हर नागरिक समानता, स्वतंत्रता और न्याय के मूल्यों को समझे और अपनाए। यह जिम्मेदारी शिक्षा व्यवस्था की है कि वह नई पीढ़ी को संविधान से जोड़कर एक बेहतर नागरिक बनाए।

इसलिए सरकार और शिक्षा विभाग को चाहिए कि छोटी कक्षाओं से ही संविधान का अध्ययन अनिवार्य किया जाए। इससे आने वाली पीढ़ी जागरूक, जिम्मेदार और लोकतांत्रिक मूल्यों की संरक्षक बन सकेगी। यही एक सशक्त और समावेशी भारत का आधार होगा।


राज कुमार
sabkajammukashmira@gmail.com
सबका जम्मू कश्मीर समाचार पत्र के मुख्य संपादक









