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गणेश कुमार शर्मा: जम्मू-कश्मीर की शिल्प विरासत, विश्व मंच पर भारतीय कला का गौरव

सबका जम्मू कश्मीर
हीरानगर/जम्मू: जम्मू के प्रसिद्ध मूर्तिकार गणेश कुमार शर्मा ने अपनी अद्भुत कला प्रतिभा और निरंतर साधना से न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि पूरे भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय कला जगत में रोशन किया है। उनकी मूर्तियाँ आज विश्व के कई देशों में निजी और सार्वजनिक संग्रहों की शोभा बढ़ा रही हैं।

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गणेश कुमार शर्मा पत्थर, ग्रेनाइट, संगमरमर, टेराकोटा और देवदार व शीशम जैसी लकड़ियों पर समान दक्षता के साथ काम करते हैं। उनकी रचनाएँ प्रकृति और मानव जीवन से प्रेरित होती हैं, जिनमें शक्ति, संवेदना और काव्यात्मक भाव स्पष्ट रूप से झलकता है। चार दशक से अधिक के अपने लंबे कला-सफर में उन्होंने मूर्तिकला को एक नई पहचान दी है।

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1991 में एक गंभीर सड़क दुर्घटना के बाद शारीरिक चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, शर्मा का हौसला कमजोर नहीं पड़ा। उन्होंने कठिन परिस्थितियों को अपनी ताकत बनाया और पूरी लगन के साथ अपने शिल्प को आगे बढ़ाया। आज वे कई उभरते कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

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गणेश कुमार शर्मा को भारत और विदेशों से अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उन्हें अमेरिका से दो बार गोल्ड मेडल, जम्मू-कश्मीर सरकार का राज्य पुरस्कार, भारत सरकार का राष्ट्रीय पुरस्कार (1998) सहित कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा उन्हें अमेरिका, इराक, मिस्र, तुर्की, जर्मनी और इटली जैसे देशों की संस्थाओं द्वारा भी सम्मानित किया गया है।

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अपनी कला उपलब्धियों के साथ-साथ उनकी सादगी, विनम्रता और मानवीय गुण उन्हें एक महान कलाकार के साथ-साथ एक श्रेष्ठ इंसान भी बनाते हैं। गणेश कुमार शर्मा आज सही मायनों में जम्मू-कश्मीर की धरोहर और विश्व की पहचान बन चुके हैं।

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