
सबका जम्मू कश्मीर।
कठुआ। पिछले दिनों जनता की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन कठुआ द्वारा धारा 163 बीएनएसएस के तहत आदेश जारी किया गया था। इस आदेश में सभी मकान मालिकों, भूमि धारकों और संपत्ति स्वामियों को बाहरी व्यक्तियों और किरायेदारों का विवरण पुलिस को देने के निर्देश दिए गए थे। इसमें घरेलू सहायक, पीजी में रहने वाले लोग, वाणिज्यिक और कृषि किरायेदार भी शामिल बताए गए थे।

हालांकि, अब यह सवाल उठने लगे हैं कि बाहरी राज्यों से आने वाले कंपनी प्रतिनिधियों और सामान बेचने वाले विक्रेताओं पर यह आदेश किस हद तक लागू होता है। इस संबंध में जिला प्रशासन की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने नहीं आए हैं।
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मंगलवार को नगरी कस्बे के ऐरवा रोड पर एक निजी कंपनी (बोरोलीन) के कुछ कर्मचारियों द्वारा प्रमोशन के लिए प्रोडक्ट का स्टॉल लगाया गया। इस दौरान स्थानीय लोगों में चर्चा रही कि क्या इस स्टॉल की पूर्व सूचना स्थानीय पुलिस या प्रशासन को दी गई थी या नहीं। यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या ऐसे बाहरी लोग, जो अस्थायी रूप से स्टॉल लगाकर उत्पाद बेचते हैं, उनकी पहचान और जानकारी की जांच की जानी चाहिए।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि नगरी कस्बा पंजाब सीमा के निकट स्थित है और वहीं अंतरराष्ट्रीय सीमा (पाकिस्तान) भी लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में आती है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में यदि बाहरी कंपनियां बिना सूचना के स्टॉल लगाकर बिक्री करती हैं, तो यह सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय हो सकता है।
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जनता का मानना है कि जिस प्रकार किरायेदारों और बाहरी व्यक्तियों की जानकारी देना अनिवार्य किया गया है, उसी तरह बाहरी कंपनियों के प्रतिनिधियों और अस्थायी विक्रेताओं के लिए भी स्पष्ट नियम होने चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि ऐसे स्टॉल लगाने से पहले स्थानीय पुलिस और प्रशासन को सूचना देना अनिवार्य हो।

अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में जिला प्रशासन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और क्या 163 बीएनएसएस के आदेश के दायरे को और स्पष्ट किया जाता है।









