जर्जर होती ऐतिहासिक बाग देओड़ी, पुंछ के लोगों ने की त्वरित जीर्णोद्धार की मांग
सबका जम्मू कश्मीर
पुंछ(राजेश कुमार): पुंछ किले के प्रवेश द्वार पर स्थित ऐतिहासिक बाग देओड़ी आज उपेक्षा और समय की मार झेल रही है। कभी क्षेत्र की शान मानी जाने वाली यह ऐतिहासिक धरोहर अब गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त अवस्था में पहुंच चुकी है। दीवारों में दरारें, झड़ती हुई चिनाई और फीकी पड़ती वास्तुकला इसके अस्तित्व पर सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता कमलजीत सिंह ने बाग देओड़ी की दयनीय हालत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह स्मारक पुंछ के गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने बताया कि पुंछ किले के पुराने प्रवेश द्वार के रूप में बाग देओड़ी ने सदियों के ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव देखे हैं और इसका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने प्रशासन और सरकार से मांग की कि इस ऐतिहासिक स्मारक के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।

स्थानीय लोगों में भी स्मारक की बदहाली को लेकर नाराजगी है। पुंछ निवासी आयशा बेगम ने कहा कि बाग देओड़ी केवल एक संरचना नहीं, बल्कि उनकी स्मृतियों और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी हुई है, जिसे इस हालत में देखना अत्यंत पीड़ादायक है।

इतिहासकारों के अनुसार, बाग देओड़ी का निर्माण 17वीं शताब्दी में डोगरा शासकों के शासनकाल के दौरान हुआ था। यह राजसी और सैन्य जुलूसों का प्रमुख मार्ग रहा है तथा सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। समय के साथ यह स्मारक पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बना।

इस बीच, प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बाग देओड़ी के जीर्णोद्धार के लिए सरकार द्वारा धनराशि स्वीकृत कर दी गई है और शीघ्र ही नवीनीकरण कार्य आरंभ किया जाएगा।









