
सबका जम्मू कश्मीर (राज कुमार)
कटरा, जो कभी सिर्फ श्रद्धा, भक्ति और दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए जाना जाता था, आज अचानक सुर्खियों में है—पर कारण आस्था नहीं, बल्कि लगातार बढ़ रहे विवाद। मां वैष्णो देवी के पवित्र दरबार के चरणों में बसे इस शहर से हर साल करोड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। लेकिन बीते कुछ वर्षों में कटरा की पहचान बदलती दिख रही है। भक्तिमय वातावरण की जगह अब चर्चाओं में प्रशासनिक निर्णयों के विरोध, रोषपूर्ण प्रदर्शन और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हावी होते जा रहे हैं।
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सबसे पहले बात पर्यटन और तीर्थ यात्रियों की सुविधा से जुड़े रोपवे प्रोजेक्ट की। इसे आधुनिक सुविधा के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा था, पर स्थानीय दुकानदारों, पिट्ठू-पोनीवालों और अन्य पारंपरिक व्यवसायों को आशंका है कि इससे उनकी आजीविका खतरे में पड़ेगी। परिणामस्वरूप कटरा से सांझीछत मार्ग तक रोपवे निर्माण के खिलाफ प्रदर्शन तेज हुए। लोगों की मांग है कि इस प्रोजेक्ट को लागू करने से पहले प्रभावित समुदायों से संवाद और पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए
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दूसरा बड़ा विवाद श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीटों के आवंटन को लेकर सामने आया है। कई स्थानीय संगठनों का आरोप है कि क्षेत्रीय विद्यार्थियों को प्राथमिकता दिए बिना बाहरी समुदायों के छात्रों को सीटें दी जा रही हैं। यह मुद्दा गरमाया और विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। समर्थकों का कहना है कि स्थानीय युवाओं के लिए यह मेडिकल कॉलेज अवसर पैदा करने हेतु बना था, इसलिए प्राथमिकता क्षेत्रीय छात्रों को मिलनी चाहिए।
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इन विवादों ने न सिर्फ सामाजिक असंतोष को जन्म दिया है, बल्कि पवित्र स्थल की गरिमा और वहां की धार्मिक आस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। कटरा जैसे आध्यात्मिक स्थानों का उद्देश्य लोगों में शांति, समानता और सद्भाव के भाव को मजबूत करना है, लेकिन वर्तमान घटनाक्रम ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है।

हालांकि यह भी सच है कि विकास और सुविधा आवश्यक हैं—रोपवे हो, मेडिकल कॉलेज हो या इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट—परंतु विकास का उद्देश्य तभी पूरा होता है जब स्थानीय संस्कृति, आजीविका और जनता की भावनाओं का सम्मान हो।

कटरा को फिर से आस्था का प्रतीक बनाने के लिए सरकार, श्राइन बोर्ड, स्थानीय नागरिकों और हितधारकों के बीच सार्थक संवाद, पारदर्शिता और संतुलित नीतियों की आवश्यकता है। विवादों का समाधान विरोध या दबाव में नहीं, बल्कि सामूहिक हित और संवेदनशील प्रशासनिक निर्णयों में है।

कटरा सिर्फ एक शहर नहीं—भारत की सांस्कृतिक आस्था का धड़कता प्रतीक है। इसे विवादों से नहीं, विश्वास और विकास के संतुलित मार्ग से आगे बढ़ना चाहिए।









