
सबका जम्मू कश्मीर
रांजड़ी (जम्मू), पूर्णिमा के अवसर पर — साहिब बंदगी आश्रम रांजड़ी में आज आयोजित सत्संग में संत सद्गुरु श्री मधुपरमहंस जी महाराज ने अपने दिव्य प्रवचनों की अमृतवर्षा से संगत को निहाल किया। उन्होंने कहा कि सभी धर्म ग्रंथों का सार एक ही है — “एक ब्रह्म की उपासना करो।”

महाराज श्री ने कहा कि साहिब बार-बार अपनी वाणी में नाम सुमिरन का महत्व समझाते हैं, क्योंकि वही नाम जन्म-मरण के रोग का नाश करता है। जैसे औषधि शरीर की बीमारी को दूर करती है, वैसे ही सत्यनाम हृदय से पाप और विकारों का नाश कर देता है।

उन्होंने कहा कि नाम के बिना मनुष्य का हृदय शुद्ध नहीं हो सकता। जब तक भीतर क्रोध, काम, अहंकार जैसे दुश्मन सक्रिय रहते हैं, तब तक मनुष्य सच्ची शांति प्राप्त नहीं कर सकता। लेकिन जब नाम हृदय में बसता है, तब ये विकार नियंत्रित हो जाते हैं और मनुष्य के भीतर दिव्यता का प्रकाश फैल जाता है।
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सद्गुरु श्री मधुपरमहंस जी महाराज ने कहा, “सत्यनाम एक ऐसी औषधि है जिसे सद्गुरु प्रदान करता है। वही नाम मनुष्य को जन्म-मरण के चक्र से पार ले जाता है और आत्मा को परम शांति की अवस्था में पहुंचाता है।”









