
सबका जम्मू कश्मीर।
जम्मू/रखबंधु। साहिब बंदगी के संत सद्गुरु श्री मधुपरमहंस जी महाराज ने आज अपने प्रवचनों की अमृतवर्षा से श्रद्धालुओं को निहाल करते हुए कहा कि साहिब ने अनेक शब्दों में उस अमर देश का उल्लेख किया है, जहाँ नाश नहीं है।
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उन्होंने कहा कि यह संसार नाशवान है — पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश — सभी तत्व अंततः एक-दूसरे में विलीन हो जाते हैं। परंतु साहिब जिस देश की बात कर रहे हैं, वहाँ ये पाँचों तत्व नहीं हैं, इसलिए वह देश अविनाशी है।

सद्गुरु जी ने धर्मदास जी और साहिब के संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्मदास जी ने पूछा था – “आप जो नाम स्थापित कर रहे हैं, वह कौन सा नाम है?” इस पर साहिब ने बताया कि वह नाम लिखा या पढ़ा नहीं जा सकता, वह गुरु के बिना प्राप्त नहीं होता।

संसार में करोड़ों नाम हैं, परंतु उनसे मुक्ति संभव नहीं।

उन्होंने कहा कि यह सार शब्द ही सत्यपुरुष स्वयं है। इसे कहा नहीं जा सकता, लिखा नहीं जा सकता — इसे केवल सद्गुरु की कृपा से ही पाया जा सकता है। नाम प्राप्त करने के बाद साधक अनुभव करता है कि कोई सजीव शक्ति उसके साथ कार्य कर रही है।

सद्गुरु जी ने उदाहरण देते हुए कहा, “पहले हमें रास्ता पूछना पड़ता था, पर अब नेवीगेटर मार्ग दिखाता चलता है। उसी प्रकार नाम भी साधक का सजीव नेवीगेटर है, जो उसे उसके वास्तविक देश — अमर लोक — की ओर ले जाता है।”









