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26 नवंबर—संविधान की गरिमा और शहीदों की वीरगाथा का प्रतीक

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सबका जम्मू कश्मीर (राज कुमार)

भारत के इतिहास में 26 नवंबर एक ऐसा दिन है जो हमें दो महत्त्वपूर्ण घटनाओं की याद दिलाता है—
पहली, संविधान दिवस, जिसने देश को दिशा, अधिकार और लोकतांत्रिक पहचान दी।
और दूसरी, 26/11 मुंबई आतंकी हमला, जिसने हमें उन अमर वीरों की याद दिलाई जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी।

संविधान दिवस का महत्व

26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान स्वीकार किया गया। यह सिर्फ कानूनों का दस्तावेज नहीं बल्कि भारत की आत्मा, मूल्यों और अधिकारों का आधार है। इसने हमें—

बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता,

न्याय, समानता और स्वतंत्रता का हक,

धर्म, संस्कृति और शिक्षा की सुरक्षा,

और लोकतांत्रिक ढंग से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की शक्ति दी।

संविधान ने हमें नागरिक होने का गर्व और अपने अधिकारों व कर्तव्यों को समझने का अवसर दिया। यह हमें याद दिलाता है कि हम एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और समृद्ध भारत के नागरिक हैं।

26/11—शहादत और साहस की कहानी

इसी तारीख पर वर्ष 2008 में मुंबई पर हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को हिला दिया था। उन कठिन क्षणों में हमारे

सैनिक,

पुलिस बल,

एनएसजी कमांडो,

और सुरक्षा एजेंसियाँ
देश की रक्षा के लिए बिना डगमगाए आतंकियों के सामने डटकर खड़ी रहीं।

उन्होंने हमें यह विश्वास दिलाया कि—
“आप चैन से सोइए, हम आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।”

उन वीरों ने अपने साहस और बलिदान से लाखों लोगों की जान बचाई और दुनिया के सामने भारत की ताकत और एकता का संदेश दिया।

इन दोनों घटनाओं को नहीं भुलाया जा सकता

26 नवंबर हमें बताता है कि—

संविधान हमें अधिकार देता है,
और शहीद हमें सुरक्षा।

संविधान हमारी लोकतांत्रिक पहचान है,
और सैनिक हमारी अस्तित्व की ढाल।

एक तरफ यह दिन हमें जागरूक नागरिक बनने की प्रेरणा देता है, वहीं दूसरी ओर देश की रक्षा में शहीद होने वालों के सम्मान में सिर झुकाने की याद दिलाता है।

राज कुमार (मुख्य संपादक)सबका जम्मू कश्मीर हिंदी समाचार पत्र
राज कुमार (मुख्य संपादक)
सबका जम्मू कश्मीर

लेखक :- राज कुमार,

gmail :-sabkajammukashmir@gmail.com 

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